हिंदी नवगीत का उद्भव और विकास | Hindi Navgeet Ka Udbhav Aur Vikas

52 min read
Hindi Navgit Ka Udbhav Aur Vikas

समकालीन हिंदी कविता में नवगीत की अपनी एक अलग और विशिष्ट पहचान है। ‘नई कविता’, ‘नई कहानी’ और ‘नई आलोचना’ की तर्ज पर ‘नवगीत’ का उदय 1948-50 ई. के आसपास हुआ। इसे नयागीत, प्रगीत, अगीत, कबीरगीत, लोकगीत इत्यादि विविधि नामों से भी अभिहित किया गया है। इस लेख में हम Hindi Navgit Ka Udbhav Aur Vikas का विस्तार से अध्ययन करेंगे ।

Read More about हिंदी नवगीत का उद्भव और विकास | Hindi Navgeet Ka Udbhav Aur Vikas

काव्य प्रयोजन | Kavya Prayojan | भारतीय काव्यशास्त्र | Bhartiya Kavyashastra

15 min read
Kavya Prayojan

किसी भी कार्य को करने के पीछे उसके कर्त्ता का कोई न कोई उद्देश्य अवश्य होता है । इसी प्रकार काव्य की रचना करने के पीछे उसके सर्जक का या कवि का कोई न कोई उद्देश्य अवश्य होता है । यही उद्देश्य काव्य का प्रयोजन कहलाता है और इसी से प्रेरित होकर वह काव्य लिखता है। Bhartiya Kavyashastra के अंतर्गत आज हम Kavya Prayojan को विस्तार से समझने का प्रयास करेंगे ।

Read More about काव्य प्रयोजन | Kavya Prayojan | भारतीय काव्यशास्त्र | Bhartiya Kavyashastra

काव्य हेतु | भारतीय काव्यशास्त्र | Kavya Hetu | Bhartiya Kavyashastra | Bharteeya Kavyashastra

16 min read
Kavya Hetu

किसी भी वस्तु के निर्माण के लिए कुछ आवश्यक साधन ज़रूरी होते हैं, जिनके अभाव में उस वस्तु का सृजन संभव नहीं हो सकता। जिन साधनों या कारणों से वस्तु का निर्माण होता है, वस्तुतः ये साधन (हेतु) कहलाते हैं। काव्य या साहित्य की सर्जना के लिए कुछ आवश्यक कारण (हेतु) होते हैं । आज हम भारतीय काव्यशास्त्र के अंतर्गत Kavya Hetu को विस्तार से समझने का प्रयास करेंगे ।

Read More about काव्य हेतु | भारतीय काव्यशास्त्र | Kavya Hetu | Bhartiya Kavyashastra | Bharteeya Kavyashastra

काव्य के लक्षण |भारतीय काव्यशास्त्र | Kavya ke Lakshan | Bhartiya Kavyashastra |Bharteeya Kavyashastra

9 min read
Kavya ke Lakshan

संस्कृत काव्यशास्त्र में काव्य के लक्षण पर पर्याप्त विचार-विमर्श हुआ है, जिससे विभिन्न काव्य सम्प्रदायों का विकास हुआ और काव्य के प्रमुख तत्वों की चर्चा करते हुए काव्य का लक्षण निर्धारित करने का प्रयास किया गया। आज काम Kavya ke Lakshan को विस्तार से समझने का प्रयास करेंगे ।

Read More about काव्य के लक्षण |भारतीय काव्यशास्त्र | Kavya ke Lakshan | Bhartiya Kavyashastra |Bharteeya Kavyashastra

डॉ. नामवर सिंह की आलोचना दृष्टि | Dr Namvar Singh Ki Alochana Drishti

25 min read
Dr Namvar Singh Ki Alochana Drishti

डॉ. रामविलास शर्मा और डॉ. नामवर सिंह ने शुक्ल-द्विवेदी विवाद को दूसरी पीढ़ी तक ले जाने और उसे जारी रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । दोनों ही प्रगतिवादी या मार्क्सवादी आलोचक हैं और दोनों की यह समान विशेषता है कि उन्होंने मार्क्सवाद को रूढ़ि के रूप में स्वीकार कारण के बजाए उदार प्रगतिशील चेतना को लेकर हिंदी आलोचना को एक नया आयाम दिया । आज के इस लेख में हम Dr Namvar Singh Ki Alochana Drishti को विस्तार से समझने का प्रयास करेंगे ।

Read More about डॉ. नामवर सिंह की आलोचना दृष्टि | Dr Namvar Singh Ki Alochana Drishti

कॉलरिज का कल्पना सिद्धान्त | Coleridge Ka Kalpana Siddhant

15 min read
Coleridge Ka Kalpana Siddhant

कॉलरिज का पूरा नाम सैमुअल टेलर कॉलरिज (Samuel Taylor Coleridge) है। इनका जन्म 21 अक्टूबर 1772 में इंग्लैंड के सेंट मेरी नामक स्थल पर हुआ । इस लेख के माध्यम से हम आज Coleridge Ka Kalpana Siddhant को विस्तार से समझने का प्रयास करेंगे ।

Read More about कॉलरिज का कल्पना सिद्धान्त | Coleridge Ka Kalpana Siddhant

शुक्ल युगीन हिंदी आलोचना | Shukla Yugin Hindi Alochana

16 min read
shukla yugin hindi alochana

वास्तव में हिंदी आलोचना का पूर्ण रूप शुक्ल युग  में ही निखर पाया और इसका श्रेय इस युग के प्रमुख आलोचक आचार्य रामचंद्र शुक्ल को है। आज के इस लेख में हम Shukla Yugin Hindi Alochana को विस्तार से समझने का प्रयास करेंगे ।

Read More about शुक्ल युगीन हिंदी आलोचना | Shukla Yugin Hindi Alochana

काव्य का स्वरूप | Kavya Ka Swarup

31 min read
kavya ka swarup

कवि की रचना को काव्य कहते हैं। कवि जीवन और जगत् की अनुभूति को शब्द और अर्थ के सामञ्जस्य का आधार लेकर अपनी प्रतिभा के बल पर रमणीय, रसात्मक और आह्लादकारी बनाकर प्रस्तुत करता है। उसकी पुनः सृष्टि करता है। उसकी यह अभिनव सृष्टि ही काव्य है। आज इस लेख में हम Kavya Ka Swarup का विस्तार से अध्ययन करेंगे ।

Read More about काव्य का स्वरूप | Kavya Ka Swarup

सन्त काव्यधारा के प्रमुख कवि और उनकी रचनाएँ |Sant Kavyadhara Ke Pramukh Kavi Aur Unki Rachanaen

19 min read
Sant Kavyadhara Ke Pramukh Kavi Aur Unki Rachanaen

‘भक्ति’ का उल्लेख सर्वप्रथम श्वेताश्वेतर उपनिषद में मिलता है । मोनियर विलियम्स के अनुसार ‘भक्ति’ शब्द की व्युत्पत्ति ‘भज’ धातु से हुई है । भक्ति का उदय दक्षिण में हुआ । इस लेख में हम आज Sant Kavyadhara Ke Pramukh Kavi Aur Unki Rachanaen का अध्ययन करेंगे ।

Read More about सन्त काव्यधारा के प्रमुख कवि और उनकी रचनाएँ |Sant Kavyadhara Ke Pramukh Kavi Aur Unki Rachanaen

टी.एस.इलियट की परम्परा की अवधारणा | T S Eliot Ki Parampara Ki Avadharna

23 min read
t s eliot ki parampara ki avadharna

आधुनिक काल के पाश्चात्य समीक्षकों में टी.एस.इलियट (1888-1965 ई.) का नाम अत्यंत महत्वपूर्ण है। इनका जन्म सेन्ट लुई (अमेरिका) में हुआ, किन्तु शिक्षा पेरिस और लंदन में हुई । बाद में वे लंदन में बस गए । वे बीसवीं सदी के महान कवियों और आलोचकों में गिने जाते हैं। उन्हें 1948 ई. में साहित्य का नोबल पुरस्कार भी प्राप्त हुआ। इलियट की सर्वाधिक प्रसिद्ध रचना “Tradition and Individual Talent” है जिसमें साहित्य की आधारभूत एवं मौलिक समस्याओं पर प्रभावी ढंग से विचार किया गया है। आलोचना के क्षेत्र में उनके अत्यंत महत्वपूर्ण निबंध इस प्रकार हैं : Tradition and Individual Talent, Poetry and Drama, The Function of Criticism, The English Metaphysical Poets, The Frontiers of Criticism. टी.एस.इलियट बीसवीं सदी के महत्वपूर्ण अंग्रेजी कवि और आलोचक हैं। वे अंग्रेजी कविता के महत्वपूर्ण आधुनिक कवि हैं। इलियट, अंग्रेजी स्वच्छन्दतावादी कवि और आलोचक वर्ड्सवर्थ एवं कॉलरिज की काव्य संबंधी स्थापनाओं के विरुद्ध अर्थात् स्वच्छन्दतावाद विरोधी स्थापनाओं के लिए जाने जाते हैं। इलियट ने अंग्रेजी … Read more

द्विवेदीयुगीन हिंदी आलोचना | Dwivediyugin Hindi Alochana

7 min read
dwivediyugin hindi alochana

हिंदी आलोचना को विकसित करने में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी का योगदान सराहनीय है। उन्हीं का अनुसरण करते हुए द्विवेदी युग के अन्य लेखक भी आलोचना की ओर अग्रसर हुए। आज हम Dwivediyugin Hindi Alochana को विस्तार से समझने का प्रयास करेंगे ।

Read More about द्विवेदीयुगीन हिंदी आलोचना | Dwivediyugin Hindi Alochana

भारतेन्दुयुगीन हिंदी आलोचना | Bhartenduyugin Hindi Alochana

9 min read
bhartenduyugin hindi alochana

वर्तमान युग में ‘आलोचना’ नामक विधा का तीव्र गति से विकास हुआ है । आलोचना का वास्तविक उद्भव संस्कृत की काव्यशास्त्रीय परंपरा में मिलता है , किन्तु हिंदी में भारतेन्दु युग से ही हिंदी आलोचना का सूत्रपात मिलता है । भारतेन्दु ने ‘नाटक’ नामक सर्वप्रथम आलोचनात्मक ग्रंथ लिखा। आज हम Bhartenduyugin Hindi Alochana का विस्तार से अध्ययन करेंगे और इसे समझने का प्रयास करेंगे ।

Read More about भारतेन्दुयुगीन हिंदी आलोचना | Bhartenduyugin Hindi Alochana

किशोरावस्था की समस्याएं और उनका समाधान | Kishorawastha ki Samasyaen aur Unka samadhan

11 min read
kishorawastha ki samsyaen aur unka samadhan

किशोरावस्था जीवन का वह पड़ाव है जहाँ बचपन धीरे-धीरे पीछे छूटता जाता है और युवावस्था की आहट सुनाई देने लगती है। यह केवल उम्र का बदलाव नहीं होता, बल्कि सोच, शरीर, भावनाओं और सपनों का भी नया जन्म होता है।

Read More about किशोरावस्था की समस्याएं और उनका समाधान | Kishorawastha ki Samasyaen aur Unka samadhan

सिद्ध साहित्य की प्रमुख विशेषताएँ । Siddha Sahitya Ki Pramukh Visheshataen  

8 min read
adikalin siddha sahitya ki pramukh visheshataen

वज्रयानी-परंपरा के सिद्धाचार्यों की वे रचनाएँ, जो दोहा तथा चर्यापदों के रूप में उपलब्ध हैं और जिनमें बौद्ध तांत्रिक मान्यताओं को वाणी मिली है, ‘सिद्ध-साहित्य’ है। सिद्ध-साहित्य बौद्ध धर्म की वज्रयान शाखा के प्रचार हेतु रचा गया था।

Read More about सिद्ध साहित्य की प्रमुख विशेषताएँ । Siddha Sahitya Ki Pramukh Visheshataen  

डॉ.रामविलास शर्मा की आलोचना दृष्टि | Dr Ramvilas Sharma ki Alochana Drishti

17 min read
Dr Ramvilas Sharma ki Alochana Drishti

आज हम मार्क्सवादी आलोचना के शिखर-पुरुष डॉ.रामविलास शर्मा की आलोचना दृष्टि पर विचार करेंगे । उन्होंने हिंदी की मार्क्सवादी  आलोचना में ‘हिंदी जाति’, ‘हिंदी जाति की सांस्कृतिक चेतना’, ‘भाषा-समाज-संस्कृति-साहित्य’, ‘हिंदी नवजागरण’ जैसी अनेक नवीन अवधारणाओं पर नया चिंतन प्रस्तुत किया है। तो आइए अब Dr Ramvilas Sharma ki Alochana Drishti को विस्तार से समझने का प्रयास करें ।

Read More about डॉ.रामविलास शर्मा की आलोचना दृष्टि | Dr Ramvilas Sharma ki Alochana Drishti

आई ए रिचर्ड्स का व्यावहारिक (समीक्षा) सिद्धांत | I A Richards ka vyavaharik samiksha siddhant

18 min read
I. A. Richards ka vyavaharik samiksha siddhant

1929 ई. में आई.ए.रिचर्ड्स का ‘प्रैक्टिकल क्रिटिसिज्म’ ग्रन्थ प्रकाशित हुआ। इसे हिंदी में व्यावहारिक आलोचना (समीक्षा) कहते हैं। I. A. Richards ka vyavaharik samiksha siddhant को समझने के लिए इस लेख को पूरा पढ़ें ।

Read More about आई ए रिचर्ड्स का व्यावहारिक (समीक्षा) सिद्धांत | I A Richards ka vyavaharik samiksha siddhant

समकालीन कविता की प्रमुख प्रवृत्तियाँ और विशेषताएँ | Samkalin Kavita ki Pramukh Pravrittiyan aur Visheshtaen

11 min read
samkalin kavita ki pramukh pravrittiyan aur visheshtyaen

‘समकालीन’ शब्द अंग्रेजी के ‘contemporary’ का पर्याय है तथा ‘समसामयिक’ का अर्थ बोधक है । इससे प्रतीत होता है कि समकालीन कविता समसामयिक संदर्भों से संबद्ध है । साथ ही, इसे युग-विशेष के संदर्भों के अनुसार बदली हुई चेतना या मानसिकता का द्योतक माना जाता है ।

Read More about समकालीन कविता की प्रमुख प्रवृत्तियाँ और विशेषताएँ | Samkalin Kavita ki Pramukh Pravrittiyan aur Visheshtaen

जनवादी कविता की प्रमुख प्रवृत्तियाँ और विशेषताएँ | Janvadi Kavita ki Pramukh Pravrittiyan aur Visheshtaen

28 min read
Janvadi Kavita ki Pramukh Pravrittiyan aur Visheshtaen

जनवादी कविता से आशय एक विशेष दौर की कविताओं से है जिनमें जनता के प्रति प्रतिबद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। जनता के प्रति यही प्रतिबद्धता जनवादी कविता को क्रांतिधर्मी चेतना से लैस करती है। इस विशेष दौर की कविता का नामकरण चीन की जनवादी क्रांति की प्रेरणा पर की गई क्योंकि माओवादी विचारधारा इस काव्यांदोलन के वैचारिक आधार को निर्मित करती है। यह प्रगतिवादी काव्यांदोलन की तार्किक परिणति है, फर्क सिर्फ इतना है कि यहाँ पर वैचारिक प्रतिबद्धता का आग्रह नहीं है। आज हम Janvadi Kavita ki Pramukh Pravrittiyan aur Visheshtaen को विस्तार से समझने और उसका विश्लेषण करने का प्रयास करेंगे ।

Read More about जनवादी कविता की प्रमुख प्रवृत्तियाँ और विशेषताएँ | Janvadi Kavita ki Pramukh Pravrittiyan aur Visheshtaen

आलोचना के प्रकार |alochana ke prakar |आलोचना के भेद | alochana ke bhed

17 min read
alochana ke prakar

किसी साहित्यिक रचना की सम्यक् परीक्षा करना, उसके गुण-दोषों का उद्घाटन करना आलोचना है । आज हम alochana ke prakar या alochana ke bhed को विस्तार से समझने का प्रयास करेंगे।

Read More about आलोचना के प्रकार |alochana ke prakar |आलोचना के भेद | alochana ke bhed

error: Content is protected !!
↑